मेरा जीवन…

बात उन दिनों की है जब मैं छोटा था 10th स्टैंडर्ड जीआईसी आगरा में पढ़ता था पापा का ट्रांसफर मेरठ होने से मैंने 12th की पढ़ाई जीआईसी मेरठ में पूरी की यह हर विद्यार्थी का वह समय होता है जब दिल में बहुत अरमान बड़े-बड़े कंपटीशनओं में भाग लेने की इच्छा शक्ति से परिपूर्ण होता है डॉक्टर तो कभी मुझे बनना नहीं था हां एक अच्छी इंजीनियर की चाहत तमन्ना हमेशा मेरे दिल में रही अचानक मेरे पिता का ट्रांसफर मेरे होमटाउन झांसी में हो गया और हम सभी झांसी आ गए मैं आपको बता दूं कि मेरठ आगरा की तुलना में झांसी एक बहुत छोटी सी जगह थी जहां पर एजुकेशन की सुविधाएं सीमित दायरे में थी यहां पर सिविल लाइंस में हमारे दो मकान थे एक में किराएदार पिछले 15 सालों से रह रहा था और एक खाली हुआ था जिसमें हम लोग शिफ्ट हो गए थे.. बस यही से मेरे जीवन के दुर्भाग्य की शुरुआत हुई किराएदार से जब मकान खाली करने के लिए कहा गया तो उसने कई मुकदमे मेरे परिवार पर लगा दिए इसकी वजह से घर में हर समय तनाव चिड़चिड़ापन रहने लगा अक्सर किराएदार से छोटी-छोटी बातों पर लड़ाई भी हो जाया करती थी जिससे मेरी पढ़ाई सबसे ज्यादा प्रभावित होगी आप सोच कर देख सकते हैं नित्य प्रतिदिन झगड़े कभी-कभी पुलिस में एफ आई आर इन सब के रहते एक छोटा बच्चा ट्वेल्थ में तो बच्चा छोटा ही होता है कैसे अपनी जीवन के गाइडलाइन को आगे बढ़ा सकता है इंजीनियर इंट्रेंस देता था रुड़की आईआईटी एम एन आर बहुत से इन कॉलेजों में जाने की चाह रहती थी लेकिन हर जगह कुछ ना कुछ परसेंट से रह जाता था मेरे पेरेंट्स पुराने जमाने के पेरेंट्स की तरह मेरे जीवन की किसी भी चीज में कोई दखल नहीं देते थे कोई गाइड नहीं करते थे बस उनको एक ही टेंशन रहता था कि उनका मकान कब खाली हो घर में हर समय इसी की बातें होती रहती थी केस जिला न्यायालय से उच्च न्यायालय उच्च न्यायालय से उच्चतम न्यायालय में चला कुल 12 वर्ष एवं अट्ठारह case चलने के बाद यह मकान सुप्रीम कोर्ट द्वारा खाली हुआ लेकिन तब तक मेरे जीवन की सही दिशा zigzag होकर इधर-उधर चलते हुए एमएससी एम फिल् तक पहुंच गई थी तभी अचानक एक इंटरव्यू कॉल बिट्स पिलानी राजस्थान से लेक्चरर इन मैथमेटिक्स कि आई जिसको देने में झांसी से दिल्ली गया एवं दिल्ली से पिलानी 4 घंटे लगते हैं वहां पहुंचने में ऐसा वीरान स्थान रेगिस्तान में दुनिया से दूर 2 दिन रहकर मैंने रिटर्न इंटरव्यू दिया यह मैं आपको यह बता दूं कि 1992 में यह वह इंजीनियरिंग कॉलेज है जहां पर उस समय घुड़सवारी की सुविधा मौजूद थी मुझे कुछ पता नहीं था मेरी इंवर्सिटी में एम फिल् पास करने वाले सिर्फ तीन लोग थे मुझे गाइड करने वाला कोई नहीं था कॉलेज वालों ने कहा कि एक weekके अंदर आपको कॉलेज ज्वाइन करना है सैलरी होगी ₹2000 सिलेक्शन की खुशी तो थी लेकिन राजस्थान में रेतीला मैदान देखकर, दुनिया से बिल्कुल आइसोलेटेड कॉलेज देखकर थोड़ा दिल बेचैन हुआ और मेरे घर पहुंचने पर मेरे माता पिता ने कहा सिर्फ 2000 के लिए कहां इतनी दूर जा रहे हो यह मेरे जीवन का पहला टर्निंग प्वाइंट था जो ऑफर यदि मैंने स्वीकार कर लिया होता तो आज मैं बिट्स पिलानी का डायरेक्टर होता किस्मत का वह दरवाजा में बंद कर चुका था जीवन में दूसरा मौका जीएलए इंजीनियरिंग कॉलेज के रूप में आया जहां इंटरव्यू के बाद मुझे ₹10000 का ऑफर दिया गया पर वही कहानी मेरे माता पिता ने कहा अब ₹10000 के लिए कहां जाओगे, तीसरा मौका मुझे इंजीनियरिंग कॉलेज अलवर के रूप में मिला एवं चौथा और अंतिम मौका मुझे अपने जीवन में मुंबई के एक इंजीनियरिंग कॉलेज ज्वाइन करने के लिए मिला मैंने सोचा था कुछ हो जाए मैं अब इस कॉलेज को जॉइन ही करूंगा मैं जा रहा था तो मेरी मां रोने लगी उन्हें लगा शायद इस बार उनका बेटा वापस नहीं आएगा उन्होंने कहा बेटा यह सब तुम्हारा ही है दो मकान है कौन देखेगा तब तो मुझे कुछ नहीं लगा लेकिन आज मैं महसूस करता हूं कि यह पेरेंट्स के द्वारा किया गया इमोशनल ब्लैकमेल ही था ……तो दोस्तों इससे सिर्फ एक ही सीख मिलती है कि माता-पिता को प्यार कीजिए लेकिन अपने कैरियर को भी उतना ही प्यार कीजिए एक अच्छा career आपको ढेर सारी अपॉर्चुनिटी देगा जिससे आप अपने माता-पिता के लिए कुछ कर सकेंगे😘🙏

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Mohabbat

कमाल की मोहब्बत थी मुझसे उसको अचानक ही शुरू हुई और बिना बताये ही ख़त्म हो गई…shreen

मैं…

गुजारे होंगे तुमने, कई दिन, महीने, साल… जो काट ना सकोगे वह एक रात में हूं। गुफ्तगू कई दफा कई लोगों से की होगी तुमने, दिल पर जो लगेगी वह एक बात में हूं। भीड़ में जब तन्हा खुद को तुम पाओगे, अपनेपन का एहसास जो करा दे वह एक साथ में हूं। बिताएं होंगे तुमने कई हसीन पल सबके साथ में, जो भुला नहीं पाओगे वह एक याद में हूं।

दोस्त

हम सबका एक दोस्त होता है, एक क्षण भी अधूरा लगता है जिसके बिना, हर खुशी अधूरी है जिसके बिना। हम सबका एक दोस्त होता है, मां-बाबा को जो बिल्कुल ना भाता हो, फिर भी उससे बात करने से सुकून आता हो। हमें डांटता हो हमारी गलतियों पर, हर जीत अधूरी लगती हो जिसके बिना। हम सबका एक दोस्त होता है। चाहे वह मीलों दूर हो हमसे, पर दिल के बेहद करीब होता है। उससे मिलने की बेचैनी जब हो, तब-तब वो दरवाजे पर दस्तक देता है, यकीनन हम सबका एक दोस्त होता है।

जिंदगी में उनकी जगह….

समझ नहीं आता कि मैं अपनी जिंदगी में तुम्हें कहां पर रखू। सांसे उलझ जाती हैं अगर सांसों में तुम्हें रखता हूं। ख्वाइशें मचल जाती हैं अगर मन में तुम्हें रखता हूं। आंखें भर आती हैं अगर आंखों में तुम्हें रखता हूं। धड़कनें रुक जाती हैं अगर दिल में तुम्हें रखता हूं। नींदें रूठ जाती हैं अगर ख्वाबों में तुम्हें रखता हूं। समझ नहीं आता कि मैं अपनी जिंदगी में तुम्हें कहां पर रखू।….……shreen.

मां …

मां मैं आज फिर से रोना चाहता हूं, आपके पास आना चाहता हूं। मैं अंदर से टूट जाना चाहता हूं, मैं खुद से नफरत करना चाहता हूं। वो बचपन का टिफिन बॉक्स बहुत याद आता है, उसको स्कूल पहुंचने से पहले खाना बहुत याद आता है। इस घर की दीवारें भी मुझे अजनबियों की तरह घूरती हैं, शायद एहसास कराती हैं कि तू कभी अपना था ही नहीं। मतलब के समुद्र से निकलकर अपेक्षाओं की नदी में डूब रहा हूं, मैं अंदर से टूट जाना चाहता हूं। मैं खुद से नफरत करना चाहता हूं, मां मैं आज फिर से रोना चाहता हूं।…shreen

मुस्कान

आपके हसीन होठों पे हर लम्हे यही मुस्कान बनी रहे। हर गमों से आप हमेशा अनजान बनी रहे। आपके पास हमेशा वह इंसान बना रहे, जिसके साथ होने से आपका जीवन हमेशा महकता रहे। मेरी यही दुआ है कि आपके जीवन के हर पल में खुशियां भरी रहे। आपकी हर दुआ, हर ख्वाहिश कबूल हो और हर लम्हे यही मुस्कान बनी रहे…. जन्मदिन मुबारक हो…..shreen

आग

ये आग भू ख मिटा देती हैं, यदि चूल्हे मैं लगे। यह आग इंसान को मिटा देती है, यदि चिंता में लगे। यह आग प्यार जगा देती है, यदि दिलों में लगे। यह आग बस्तियां जला देती है, यदि नफरत में लगे। यह आग जगह पवित्र कर देती है, यदि हवन कुंड में लगे। यह आग अंधेरा हटा देती है, यदि दीपक में लगे। इंसान का जीवन बस इसी आग के हवाले ही तो है .…

जीवन का रास्ता

मैं जीवन के रास्ते में भटक जाता, तो अच्छा होता। मैं जीवन के रास्ते में कुछ देर रुक जाता, तो अच्छा होता। मैं जीवन के रास्ते में पानी की तरह बहता गया, दरिया बन जाता तो अच्छा होता। मैं जीवन के रास्ते मैं औरो का कहा करता गया, पत्थर बन जाता तो अच्छा होता। मैं जीवन के रास्ते मैं जबरन ईश्वर से गिला करता रहा, में किस्मत लिख देता तो अच्छा था। मैं जीवन के रास्ते मैं खुद को बदलता ही गया, मैं खुदगर्ज बन जाता तो अच्छा था।…….shreen.

ख्वाहिश

तेरे अंतर्विरोध से मेरी ख्वाहिश नहीं बदलेगी। तुम दुनियां को बता क्यों नहीं देती स्वम ही जूझती रहतीं हो, महीनों बीतने वाले हैं या तो एकदम पास अा जाओ, या बिलकुल दूर चली जाओ, तेरे अंतर्विरोध से मेरी ख्वाहिश नहीं बदलेगी।